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मेरी वसीयत

सब कुछ वापस लौटाना होगा। अग्नि को वापस कर देना वो अंगार जो मेरे सीने में सदा सुलगता रहा। जल वापस चाहेगा वो सारी करुणा,सारे आँसू जो रह गए, बिना बहे। पृथ्वी को लौटाना होगा धैर्य  और आनंद का वह अक्षय पात्र जो कभी रीता न हुआ। पवन के हवाले कर देना मेरे पूर्ण, अपूर्ण... Continue Reading →

नदी अभी मरी नहीं है

नदी के किनारे-किनारे शहर बसा था कभी शहर के बीच अब एक बेचारी नदी रहती है। नदी का मिज़ाज अब अपना लिया है सड़कों ने नदी बेसुध सी पड़ी है और सड़कें बहतीं हैं। नदी का शहर से ताल्लुक कोई रहा ही नहीं सिर्फ बरसात में बहने की इजाज़त है इसे किसी कैदी की तरह... Continue Reading →

झबरीले

सोफे पे, गद्दे पर, कुर्सी के ऊपर और टेबल के नीचे कपड़ों पे चिपके और पर्दों से लटके, प्याजों की डलिया में गमलों में, बगिया में हर लम्हा झड़ते हवाओं में उड़ते घर के हर कोने में बाल पड़े हैं। मुश्किल हटाना है दुनियांँ भर के झाडू कोशिशें कर कर के थक कर पड़े हैं।... Continue Reading →

मेरे दुश्मन, मेरे दोस्त..

आगे आगे दौड़ेगा तो मुझसे पहले पहुँचेगा . मंजिल कहाँ कहाँ रुकना है तुझे नहीं है कोई खबर। अभी तो मौसम खुशगवार है अभी तो जीना सीखें हम, आगे जा के रुकना पड़ा तो कब तक राह तकेंगे हम? क्या तू मेरा दोस्त बनेगा मिल कर मज़े करेंगे हम, या फिर काँटे जैसा चुभेगा हर... Continue Reading →

Art in Heart

यहीं कहीं एक नन्हाँ मुन्ना उनींदा सा सपना जाग हक़ीक़त बनने को बेताब खड़ा है। कलम मुन्तज़िर है कि कोई उँगलियाँ उसे उठाएँ। कागजों के ढेर में छिपी एक कहानी इंतज़ार में कब उसकी बारी आए। रंगों, ब्रशों को तकता कॅनवास उम्मीदों से सिहर रहा, कि शक्ल ले रहा है एक खयाल धीरे धीरे ज़हन... Continue Reading →

दूर के ढोल

वो वादी जो धरती पे जन्नत की मूरत है जहाँ की हर इक  शै बहुत खूबसूरत है हवाएँ महकती हैं खुशबू ए केसर से पर्वत सजे से हैं फूलों के जेवर से झरनों और झीलों में  बर्फीला पानी है चिनारों  के सीनों में आदिम कहानी है खुद हाथों से तोड़ के सेब आडू खाऊँ, बरसों... Continue Reading →

इंद्रधनुष

अगली बार जो बरसे बारिश बंद आँखे कर लेना और सुनना टप टप झरती बूंदों की  वो आवाज .. जो अलग है नल से टपकते पानी की आवाज से, जो अलग है गीली पलकों से ढलकती बूंदों के अंदाज़ से, जो अलग है समुंदर की गरजती लहरों के गाज से, जो अलग है बहते झरने ... Continue Reading →

मुझे सब याद है ना!

तुम मेरा नाम भी अक्सर इन दिनों भूल जाती हो। वो सब कुछ जो तुम्हारी जिंदगी था,और जो तुमको तुम बनाता था वो जज़्बा,जो तुम्हारी शख्सियत था,अब वो ना जाने कहाँ गुम है! भले खोई हुई सी ही सही मगर ये अब भी तुम ही हो। तुम्हारा ही लहू है, दौड़ता जो मेरी रग रग... Continue Reading →

तीस साल बाद..

झरने की तरह उसके लब से यूं लफ़्ज़ धबाधब झरते हैं। उसके अल्फाज़ों के रेले मन को आंदोलित करते हैं। जाने कैसे इतनी जल्दी वो इतना सब सोच भी लेता है उसके एहसासों का  बादल शब्दों को खोज भी लेता है उसकी बातें हैं आग कभी उसकी बातें हैं पानी भी अक्सर तो तीर सी... Continue Reading →

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