बिल्ली विश्वविद्यालय(15)

एक फूँक जादू की ..सपनों से सतरंगी, हवाओं के पंख लगा,चारों ओर उड़ने लगेबुलबुले साबुन के।बिल्लियाँ बौराई सीपकड़ने को दौड़ पड़ींपर फट से फूट गएहवाओं के गुब्बारे,घुल गए हवाओं मेंऔर मानो जादू हो,यूँ गायब हो गएजैसे कभी थे ही नहीं।उतनी ही जान थीउतने से लम्हों की।साबुन के बुलबुले काजितना हो सकता था,उतना सा ही था... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय (14)

जेरूसलम की बिल्ली ये खंडहर किसी ज़माने में आलीशान महल था, जो फलां धर्म के अमुक राजा ने फलां सदी में अपनी फलां रानी के लिए बनवाया था। और फलां आक्रमणकारी ने अमुक सदी में फलाना वजह से इस बरबाद किया था। गाईड अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा था समझाने की, लेकिन उसकी... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय (12)

(कुछ सवाल आइंस्टाईन से) तुम्हे एक ही ज़िंदगी में मिलते हैं नौ मौके या अलग अलग नौ बार दुनियाँ में आते हो। बार बार वहीं लौट कर आते हो या फिर हर बार नए घर,नए लोग आज़माते हो। जाने कितने राज़ हैं तुम बिल्ली जात के सदियों से कैसे तुम उन्हें छिपाते हो? हम तो... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय (11)

कभी ऐसा हुआ नहीं,कि बीमार पड़ा घर में कोई और बिल्ली ने आ कर उसका हाल पूछा नहीं। सिरहाने बैठ कर बाकायदा परेशान होती हैं बिल्लियाँ! पर बिल्ली का प्रेम छतरी सा है। कड़ी धूप हो या हो धूँआधार बारिश, ज़रूरत हो,तो छाते सा तन जाता है। बचाता है,सहारा देता है। लेकिन उन बेवकू़फों का... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय (10)

क्या लिखूँ... चाहती हूँ कोई बहुत खूबसूरत बात लिखूँ नदी लिखूँ पहाड़ लिखूँ, सारी कायनात लिखूँ । बिल्ली की बड़ी बड़ी बिल्लौरी आँखों से झाँकता है जो अब भी, सदियों से खोए उस जंगल की बात लिखूँ। बिल्ली के पाँवों से मेरे भी उसके भी सपने में आता है, छप्पर की चाहत में जो पीछे... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय (9)

यूँ ही ब्रश उठा कर पहाडों को पीला रंग दूँ गेरूआ रंग दूँ घाँस को और आसमान सुनहरा कर दूँ। पैरों तले रख दूँ आँधियाँ या समुंदर को छत कर लूँ। बालों में फूलों कि तरह चाँद और सूरज लगा लूँ या फिर दोपहर का आँचल सितारों से भर दूँ। जब कुदरत कर सकती है... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय(8)

एक साज़ बिल्लियाना घुरघुराना,पर्रपर्राना ऐसे नीरस शब्द उस घटना को व्यक्त करने में पूरी तरह नाकाम हैं जब बिल्ली आपके सिरहाने आ कर आपके ही तकिए पर सर रख दे, या फिर आपके सीने पर संतुलित कर खुद को आँखे बन्द कर ले। या जब आप कोई किताब ले हाथ में सोफे पर पसरे हों... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय (7)

शेर की मौसी शहद से भरी प्यालियों सी बड़ी बड़ी खूबसूरत आँखे, नर्म मखमल सा बदन मासूम चेहरा। ईश्वर की बनाई सबसे खूबसूरत रचना! बड़े शाही अंदाज मे आपके सामने है। आप खुद को रोक नाहीं पाते। हाथ बढा कर छू लेते हैं उठा कर भींच लेना चाहते हैं गोद में। आप नजरअंदाज कर रहे... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय(6)

झंडे सी तनी है ऊपर को, या दाएँ-बाएँ हिलती है, हौले हौले लहराती है, हर हलचल कुछ तो कहती है। हल्का सा इशारा पूँछ का ही हर बात बयाँ कर जाता है, ऑरी को हमारी बोलने की थोड़ी भी जरूरत लगती नहीं। लगता है देख के बिल्ली को है शायर ने ये बात कही, है इल्म की... Continue Reading →

बिल्ली विश्वविद्यालय (4)

झब्बू बिल्कल नहीं सुनता ज़रा भी नहीं। अक्सर तो वो इसलिए नहीं सुनता कि वो कोई कुत्ता नहीं है। कभी इसलिए नहीं सुनता क्योंकि वो बिल्ली है। कभी उसका मन नहीं होता। और कभी कभी उसका मन होता भी है... पर वो इसलिए नहीं सुनता कि वो नहीं चाहता कि किसी को ये गलतफहमी हो... Continue Reading →

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